यहाँ ब्रज क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों की सूची दी गई है। इस सूची में वृंदावन मंदिर, मथुरा मंदिर, बरसाना मंदिर, गोवर्धन मंदिर और गोकुल मंदिर शामिल हैं।
वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर जैसे प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं। मुख्य रूप से लोगो ने इन्ही के बारे मे सुना या देखा है| वृंदावन मे और भी बहुत से ऐसे मंदिर है| इनमे से कुछ बहुत सुन्दर और मनोरम है| चारधाम, चंद्रोदय, राधाबल्लभ, प्रियकान्त जूं और मदन मोहन मंदिर इनमे से कुछ प्रमुख मंदिर है| गरुण गोविंद मंदिर सर्प दोष निवारण के लिए प्रसिद्ध है| वृंदावन मे कई ऐसे भी मंदिर है जो अपने रहस्यों के लिए प्रसिद्ध है| निधिवन मे स्थित रंगमहल मंदिर और वृंदावन मे ही दक्षिण भारत के वास्तुकला के अनुसार बना श्री रंगनाथ जी मंदिर रहस्यमयी मंदिर है| यह स्थान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के लिए प्रसिद्ध है।
मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि है जहाँ श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर प्रमुख आकर्षण है| मथुरा मे प्रमुख तीर्थ स्थान द्वारकाधीश मंदिर भी है| भूतेश्वर मंदिर, पोतरा कुंड, गीता मंदिर, पागल बाबा मंदिर, जय गुरुदेव मंदिर और केशव देव मंदिर मुख्य है|
बरसाना राधा रानी की जन्मस्थली है। यहाँ राधा रानी मंदिर प्रसिद्ध है। बरसाना मे कीर्ति मंदिर श्री राधारानी जी की माता श्री का भी मंदिर है|कीर्ति मंदिर जगद्गुरु कृपालु जी महाराज के द्वारा बनाया गया है| इस मंदिर की वास्तुकला वृंदावन के प्रेम मंदिर से मिलती जुलती है| बरसाना मे रंगीली महल, शांकरीखोर, मानगढ़ मंदिर और राधा रानी का मंदिर प्रसिद्ध है|
गोवर्धन पर्वत और दानघाटी मंदिर यहाँ के मुख्य धार्मिक स्थल हैं। गोवर्धन गोवर्धन परिक्रमा के लिए प्रसिद्ध है| गोवर्धन पर्वत को गिरिराज पर्वत भी कहते है| इसका अर्थ होता है - पर्वतों के राजा| गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा 21 किलोमीटर की है| गोवर्धन पर्वत के चारों तरफ बहुत से पवित्र और मनोरम कुंड और सरोवर भी है| कुंड और सरोवर के लिए आप हमारी वेबसाईट के सरोवर पेज को देख सकते है| इस पेज पर ब्रज 84 कोस मे आने वाले सभी प्रमुख कुंडों और सरोवरो का विवरण दिया गया है|
गोकुल में नंद भवन और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े मंदिर हैं। गोकुल का नन्द भवन यशोदा भवन भी कहलाता है| इसमे 84 खंबे है| इसलिए यशोदा भवन चौरसी(84) खम्बा मंदिर भी कहलाता है| यहाँ प्रसिद्ध भक्त रसखान की समाधि स्थल भी है| इसके अलावा यशोदा मैया ने श्री कृष्ण को ऊखल से बांध दिया था| वह स्थान भी ऊखल बंधन के नाम से विख्यात है| संतों की तप स्थली रमनरेती भी यही है| कहा जाता है की रमनरेती आश्रम मे ब्रज की रज मे भगवान श्री कृष्ण बाल्यवस्था मे खेला करते थे| आज यहाँ श्रद्धालु लोट पोट कर ब्रज की राज अपने शरीर मे लगाते है|
प्यारे श्रद्धालुओं मथुरा- वृंदावन के अलावा ब्रज मे अन्य कई महत्वपूर्ण मंदिर है| इनमे नंदगाँव का नन्दभवन, कोकिलावन का शनि धाम मंदिर, गोकुल के पास चिंताहरण महादेव मंदिर, और आदि बद्री चरण पहाड़ी प्रमुख है|